सर्वश्रेष्ठ लघुकथा कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

1 - The girl in the train.
द्वारा Rohit Suthar

Adventure suspense story.One girl who smart and intelligent, working on MNC company as Senior Sales Manager. She resides at Texas. She travelled by train everyday.Adventure suspense story.One girl who ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 11
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' हिसाब दफ़्तर में उसकी बगलवाली सीट पर बैठनेवाली सहकर्मी रोज़ाना के वक़्त से आधा घंटा देर से आई. उसने गौर से उसे देखा. ...

लिखी हुई इबारत - 5
द्वारा Jyotsna Kapil

9 - दंड                       गाड़ी से उतरकर , बहुत आत्म विश्वास के साथ धीरज ने अपना चेहरा मोबाइल की स्क्रीन  में देखा। नोटों से भरे हुए सूटकेस को हल्के से थपथपाया।आज ...

एक अनोखा दिन
द्वारा Vinayak Potdar

आज सुबह से ही मैं बड़ी अच्छे मूड में थी। चाहे आज देर से उठी और तैयार होकर ऑफिस निकलने  के लिए देर होने वाली थी पर इससे मुझे ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 10
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' नज़र बनाम नज़र मेट्रो में यात्रा करने के दौरान कोट की जेब में हाथ डाला तो बस की एक पुरानी टिकट हाथ में ...

बिल्कुल सही वसीयत
द्वारा Shakuntala Sinha

                                               कहानी -  बिल्कुल   सही वसीयत         ¨ जीवन के अंतिम पड़ाव में आ कर इतना कष्ट भोगना होगा  , ऐसा  कभी सोचा भी न था मैंने  . ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 9
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' लालच लोकल बस से उतरकर मैं तेज़-तेज़ कदम बढ़ाते हुए अपने दफ़्तर की तरफ़ बढ़ रहा था. आज तो दफ़्तर पहुँचने में कुछ ...

लिखी हुई इबारत - 4
द्वारा Jyotsna Kapil

लिखी हुई इबारत        बड़ी बेसब्री से बेटे की पसन्द देखने का इंतज़ार करती डॉक्टर शिल्पा उस लड़की को देखकर चौंक गई।       " ये क्या , शिशिर को यही मिली थी ...

चॉकलेट
द्वारा SURENDRA ARORA

चॉकलेट उसने जब से होश संभाला उसका बाप जिसे वो बापू कहता था, उसके लिए हर शाम दफ्तर से लौटते हुए एक चॉकलेट लाता और उसे अपनी गोद में ...

लिखी हुई इबारत - 3
द्वारा Jyotsna Kapil

मुफ़्त शिविर           छोटे-छोटे बच्चे,दो वक़्त की रोटी जुटाने की मशक्कत,और बिटिया की जान पर मंडराता खतरा देखकर परमेसर सिहर उठा। अंततः उसने अपनी एक किडनी देकर ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 8
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' कारण लोकल बस में मैं एक और एक अन्य नवयुवक ‘केवल महिलाए’ वाली सीट पर साथ-साथ बैठे सफ़र कर रहे थे. एक स्टॉप ...

इंसानियत
द्वारा Shakuntala Sinha

                                  कहानी  -   इंसानियत  मैं पूरे दो साल बाद बेटे के साथ  पटना आया था  . बंगलुरु  से पटना तक तो फ्लाइट से आया , पर पटना से अपने ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 7
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' स्थितियाँ स्टेशन पर दस मिनट रूककर गाड़ी आगे चल चुकी थी, मगर मेरे दिमाग़ में अब भी पन्द्रह-बीस मिनट पहले का घटनाचक्रम घूम ...

दो लघुकथाए
द्वारा SURENDRA ARORA

भटकाव " थोड़ी देर रुक कर जाना." जैसे ही वो निकलने को हुआ, कविता ने टोक दिया. " मैं फ्री हो चुका हुँ. अब रुकने की क्या जरुरत है ...

लिखी हुई इबारत -2
द्वारा Jyotsna Kapil

मिठाई                     रात को सोने से पहले परेश ने घर के दरवाजों का निरीक्षण किया। आश्वस्त होकर अपने शयनकक्ष की ओर बढ़ा ही था कि तभी सदा के नास्तिक बाबूजी को ...

फ़ोटो
द्वारा amitaabh dikshit

अपनी गाड़ी वर्कशाप में देने के बाद, मैं चौराहे की ओर बस स्टैंड की तरफ निकल गया। शायद इस गरज से कि बस या टैक्सी कुछ भी मिल जाये ...

कितने त्रिशंकु - 1
द्वारा Dr kavita Tyagi

1. कितने त्रिशंकु आखिर क्यों आज हमें हर घर में हमें त्रिशंकु के दर्शन हो रहे हैं ? इसका कारण हम सबको मिलकर खोजना होगा ! लेकिन कारण खोजने से ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 6
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' भलमनसाहत रात के सवा दस बजे थे, अम्बाला जाने के लिए करनाल के बस अड्डे पर खड़ा मैं बस का इन्तज़ार कर रहा ...

लिखी हुई इबारत ( लघुकथा संग्रह )
द्वारा Jyotsna Kapil

1 - चुनौती          जूनागढ़ रियासत में जबसे वार्षिक गायन प्रतियोगिता की घोषणा हुई थी संगीत प्रेमियों में हलचल मच गई थी। उस्ताद ज़ाकिर खान और पंडित ललित शास्त्री दोनों ही ...

अनपढ़ वैज्ञानिक
द्वारा Archana Anupriya

        "अनपढ़ वैज्ञानिक "                        -  अर्चना अनुप्रियाकठुआ गांव के किसानों में खलबली मची हुई थी ।सभी किसान गांव के बीचोंबीच बने मैदान में बरगद के नीचे इकट्ठे हो गए थे। सबकी ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 5
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' चोरी इतवार की शाम को साहब ने अपने दोस्तों के साथ अगले दिन दोपहर को किसी रेस्टोरेंट में खाना खाकर फिल्म देखने का ...

प्लीज पापा
द्वारा SURENDRA ARORA

प्लीज पापा " पापा ! आज आपकी बहुत याद आई. सब लोग हँस रहे थे.खुद हंसने के साथ - साथ,हँसा भी रहे थे. मैं चुप थी. मेरी समझ में ...

पेन फ्रेंड
द्वारा Shakuntala Sinha

                                                           ...

यारी - 4
द्वारा Prem Rathod

हम सब के मना करने के बावजूद भी रघु ने पानी में छलांग लगा दी, कुछ देर तक रघु पानी से बाहर नहीं आया। हम सब लोग वहीं पर ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 4
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' डर शाम को घर पहुँचकर मैंने बहुत डरते-डरते खिलौने का डिब्बा मुन्नू के हाथ में पकड़ाया. उसका जन्मदिन बीते एक हफ़्ता हो गया ...

नाला में जिंदगी
द्वारा Archana Singh

भोला अपने मां बाप का एकलौता बेटा गांव से शहर नौकरी करने के सिलसिले में आ जाता है। माता पिता जरा गरीब होते हैं लेकिन बेटे को लेकर उनके ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 3
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' रिश्तों का दर्द शाम के समय वह दफ़्तर से घर पहुँचा, तो उसे बहुत तेज़ भूख लगी हुई थी. उसने सोचा था कि ...

नाम.
द्वारा SURENDRA ARORA

नाम " लगता है, पागल हो गए हो " " क्या हुआ, मैंने बावलों जैसा कौन सा काम किया है ? " " रोज - रोज फोन और वो ...

हिम्मत-ए-मर्दा
द्वारा Satvinder kumar Rana

"शादी को सात दिन हो गए हैं। लेकिन कायदे से हमारी सुहागरात अभी तक नहीं हुई।"आज शायद उसका पति कुछ ठान कर ही आया था।पर उसकी तरफ से कोई ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 2
द्वारा Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' मजबूरियों की समझ बच्चा बड़ी बेसब्री से पापा के दफ़्तर से वापिस आने का इन्तज़ार कर रहा था. परीक्षाएँ पास आ रही थीं ...