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दुर्गेश जी का काव्य संग्रह
द्वारा Durgesh Tiwari

         (गाथा बुढ़िया माई का)चली आ रही बारात एक ओर,जिसमें लोगो की भीड़ जोड़ एक ओर।नाच रहा जोकर जोड़-२ एक ओर,थोड़ी देर में मची शोर जोड़ ...

From Bottom Of Heart - 10
द्वारा Jiya Vora

1.मेरे विचार आज बह रहे है इस कलम से,   और जाकर ठहरे हैं इन पन्नों पे | इस पंक्तियों के बीच दबे हैं कहीं अल्फाज,  जिनमे मैंने छुपाकर भी खोल दिए ...

ख़ामोश आवाजें...
द्वारा Satyendra prajapati

__१__हक भी अदा किया है.... जिस्म से मानो जान को जुदा किया है। इक बाप ने अपनी बेटी को विदा किया है।। सब मांगते हैं यहां हक अपना-अपना मगर। आज इक ...

मे और मेरे अह्सास - 16
द्वारा Darshita Babubhai Shah

मे और मेरे अह्सास भाग -16 आधीसे ज्यादा जिंदगी सीखनेमे निकल जाती है lआधी से जिंदगी क्या सीखा समझने मे जाती हैं ll ******************************************************* वक़्त का ही खेल है ...

बेनाम शायरी - 4
द्वारा Er Bhargav Joshi

                            बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ?? ??अपने वजूद को यूं बचाए रखकर समर नहीं ...

बेनाम शायरी - 3
द्वारा Er Bhargav Joshi

                     बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ??ये शराब तो बस नाम से बदनामी झेल रही है।असल में नशा तो ...

From Bottom Of Heart - 8
द्वारा Jiya Vora

1.माँ !याद है मुझे, जब बचपन मै मैं  गलतियां करती थी, तब तु मेरी शरारतो को माफ कर, मुझे प्यार से समजाती भी थी|पर आज जब भूल होने पर दुनिया डाटती हैं, तब ...

दिल ऐ नूर
द्वारा મોહનભાઈ

========दिल ए नूर, टपकता है टपक टपक,मन कहीं चमकता है, चमक चमक;आइना ए दिल। , रोशन चांद सूरज,रुह ए दिल जिंदगी है ,लपक झपक;====================

मे और मेरे अह्सास - 15
द्वारा Darshita Babubhai Shah

मे और मेरे अह्सास भाग 15 दुनिया की जंजीर तोड़कर आजा lप्यार के बंधन मे बंधकर आजा ll ********************************************************************* फोन पे बाते करना अच्छा लगाता है lपर नज़रे तुझे ...

From Bottom Of Heart - 7
द्वारा Jiya Vora

1.Not everytime It is her attitude, If she is ignoring you.But Sometimes, It is her SELF RESPECT!2.दिल क्या चाहता है! जब सारी उम्मीदें टूट जाती  हैं, जब सारी कोशिशें नाकाम हो ...

ये मेरा और तुम्हारा संवाद है #कृष्ण – 2
द्वारा Meenakshi Dikshit

  1.       तुम्हारे स्वर का सम्मोहन तुम्हारे अनुराग की तरह, तुम्हारे स्वर का सम्मोहन भी अद्भुत  है, अपनत्व की सघनतम कोमलता, और सत्य की अकम्पित दृढ़ता का ये संयोग ...

सिर्फ तुम.. - 3
द्वारा Sarita Sharma

सिर्फ तुम-3दर्द जब हद से बढ़ जाता है,चीखना चाहते है..चिल्लाना चाहते है.  मन में जमी धूल एक पल में निकालना चाहते है...चाहते हैं कह दें सब हाल-ए-दिल,पर कुछ कह नहीं ...

जय हो बकरी माई
द्वारा Ajay Amitabh Suman

(१)   जय हो बकरी माई   बकरी को प्रतीक बनाकर मानव के छद्म व्यक्तित्व और बाह्यआडम्बर को परिभाषित करती हुई एक हास्य व्ययांगात्म्क कविता।   सच कहता हूँ ...

मे और मेरे अह्सास - 14
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 224

मे और मेरे अह्सास भाग -14 जाम पे जाम पीए जा रहे हैं lशाम का नाम लिए जा रहे हैं ll ******************************************* *शाम है जाम है और क्या चाहिये**काम ...

बेनाम शायरी - 2
द्वारा Er Bhargav Joshi
  • (31)
  • 783

                                                 "बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???एक ...

मे और मेरे अह्सास - 13
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 369

मे और मेरे अह्सास भाग-13 आदमी खुद को जान लेता हैं lये जग उस को पहचान लेता है ll ************************************ शुरुआत जोरदार होने से कुछ नहीं होता lजीत ने ...

अर्धनिमिलिप्त
द्वारा Er Bhargav Joshi
  • (24)
  • 671

                                   "अर्धनिमिलिप्त"??? ?? ??? ?? ???                ...

From Bottom Of Heart - 4
द्वारा Jiya Vora
  • 317

1.Kheriyat maat pucho hamari,Hum to sirf unhi ke khwaab mein rehte hai!Unse dur chahe kitne bhi ho fasle,Par hum to sirf unhi ke dil mein dhadak te hai! 2.थे ...

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा )
द्वारा Pranava Bharti
  • 300

और ख़ामोशी बोल पड़ी  (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------              ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर ...

कुछ अछांदस रचनाएं
द्वारा Pranava Bharti
  • 161

(कुछ अछांदस रचनाएं)                                                      ...

मे और मेरे अह्सास - 12
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 290

मे और मेरे अह्सास भाग- १२ उदास मत हो lजी ले जिंदगी ll वो लम्हें ना रहे हैं lये लम्हें ना रहेगे ll तू जी रहा था जैसे lफिरसे ...

बेनाम शायरी - 1
द्वारा Er Bhargav Joshi
  • (37)
  • 818

                        "बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" ...

एक लड़की
द्वारा Archana Yaduvanshi
  • 282

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो ...

फितरत इंसान की
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 228

मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने ...

मेरे लफ्ज़ मेरी कहानी - 4
द्वारा monika kakodia
  • 267

मैं एक लेखिका हूँ इस नाते ये मेरा दायित्व है कि लोगों की सोच पर पड़ी हुई गर्द को अपने अल्फ़ाज़ से साफ कर दूँ , हो सकता है ...

कुछ दूर तलक
द्वारा Niyati Kapadia
  • (11)
  • 394

कुछ दूर तलक आज यूं ही निकल पड़ी थीथोड़ी देर बाद में रुकीपिंछे मुड़कर देखा तो,वहां कोई नहीं था।कोई भी नहीं।कहा चले गए वो सब लोग?जिन्हे में जानती थीयहां ...

कविता एक नए अंदाज़ में
द्वारा Writer Dhaval Raval
  • 231

बेस्ट मोटीवेशन  लेख अभी  पढ़े और सबको पढ़ाए भी और हा ऐसे लेख कविता पढ़ने के लिए आज ही हमें मातृभारती पर फॉलो करें टिक टोकमे भी फॉलो करे ...

मे और मेरे अह्सास - 11
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 451

मे और मेरे अह्सास भाग-११ आँख से बरस रहीं हैं बारिसे lकिस ने की है धूप मे साजिसे ll मिलन की आश लगाए बेठे है lजाने कब पूरी होगी ...

माँ एक गाथा: भाग : 5
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 354

दादी की ममता है न्यारी ,पोतो को लगती है प्यारी ,लंगड़ लंगड़ के भी चल चल के ,पोते पोती को हँसाती है ,धरती पे माँ कहलाती है। कितना बड़ा ...

अभिव्यक्ति - काव्य संग्रह पार्ट- 1
द्वारा Rishi Sachdeva
  • 282

"निःशब्द"शब्द को निःशब्द कर दूं, वाणी को विराम दूँ,,ह्रदय में है आज कुछ ऐसा करूँ की स्वयं को अभिमान दूँ ।।संवेदनाएं है मृतप्रायः आज उन्हें जाग्रत करूँ,, हूँ मैं मानसपुत्र ...