सर्वश्रेष्ठ मनोविज्ञान कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

वह एक दिन
द्वारा Lovelesh Dutt

वह एक दिन--लवलेश दत्त‘उफ! यह तो बहुत मुसीबत हो गयी’, अखबार की हेडलाइन ‘देश में इक्कीस दिन के लिए संपूर्ण लॉक डाउन’ पर नज़र पढ़ते ही शर्मा जी के ...

क्रिप्टो करेंसी सही या गलत ।
द्वारा Heena Mahenoor
  • 83

इस दुनिया में जीवन यापन करने के लिए व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है, अपनी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लोग एक दूसरे से लेनदेन करते ...

जिंदगी
द्वारा Venu G Nair
  • 170

  लोग कहते हे  " जिंदगी एक सफर है "।  लेकिन  ऐ  नहीं पता यह कब शुरू होता है और कब खतम।  हर इंसान अपनी जिंदगी अलग अलग जगह ...

आलोचक जात
द्वारा Sonu Kasana
  • 101

आपने इस शब्द के बारे में अवश्य ही बहुत कुछ सुन रखा होगा और कुछ ना कुछ समझ भी रखा होगा और निश्चित रूप से आपके लिए आलोचक के ...

परिचय - मेरे साथ चाणक्य निती
द्वारा Nimish Pansuriya
  • 192

             "चाणक्य नीति " , जब यह पुस्तक लोगों के सामने आती है तब अधिक प्रमाण में लोग इस पुस्तक को एक राजनीतिक मुद्दे ...

कैसा हक ?
द्वारा Sonu Kasana
  • 169

बीरबल के 2 पुत्र थे तथा उसकी पत्नी काफी अच्छी थी वे सब बहुत खुश थे बीरबल प्रतिदिन कार्य पर जाता तथा आजीविका कमा कर के लाता था। प्रतिदिन ...

सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यूँ की.?
द्वारा Archana Yaduvanshi
  • 314

सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यूँ की...?सुशांत सिंह राजपूत ने ख़ुदकुशी कर ली. मात्र चौंतिस साल की उम्र में एक सफल एक्टर, प्रसिद्ध व्यक्तित्व और शरीर से स्वस्थ इंसान ...

स्वर्णिम भारत की और......
द्वारा Rishi Sachdeva
  • 214

कठिन समय है, मानवीय संवेदनाएँ काँच की तरह होती है, कब टूट जाये , पता ही नहीं लगता।मनोवैज्ञानिकों का कहना कि आज जो परिदृश्य है, उसमें आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक ...

दुःख या अवसाद
द्वारा Roopanjali singh parmar
  • 361

कुछ लोग इतने दुःखी होते हैं, कि जरा सी बातें ही इनकी आंखों को भर देती हैं। दुःख इस हद तक इनमें शामिल होता है कि ये सुख और ...

विचार !!
द्वारा SP ENTERTAINMENT
  • 1.2k

अभी आप जो सोच रहे हो वही आपके विचार है या नही ?? जरा सोचिए।। क्या आप उसे रोक सकते हो?? हा, जरूर ।। पर उसके लिए आपको अपने ...

लॉक डाउन के पन्ने - प्रकृति कुछ कहती है :
द्वारा Rishi Sachdeva
  • 1.1k

"ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा" और निश्चित रूप से ये समय भी जीवन में दुबारा नहीं आएगा।अधिकांश लोगों का मानना है कि ये मानव निर्मित अभिशाप है, कुछ का कहना ...

सुराख से झाँकती ज़िंदगी
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • (12)
  • 584

     मम्मा से लड़कर, गुस्सा होकर अपनी सहेली के घर गयी स्वरा तुरन्त ही लौट आयी थी . रह रहकर दोनों घरों की तस्वीर उसकी आँखों के सामने ...

प्रकृति मैम - मुकाम ढूंढें चलो चलें ( अंतिम भाग)
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 781

मुकाम ढूंढें चलो चलेंकफ परेड के पांच सितारा प्रेसिडेंट होटल में मैं बैठा था। वहां अगली सुबह जल्दी एक कार्यक्रम होना था। तैयारी के लिए रात को वहां रुकने ...

पानी : तुम मुझे बचाओ में तुम्हे बचाऊंगा
द्वारा paresh barai
  • 495

पानी हमारे जीवन की एक बेहद अहम् ज़रूरत है | भोजन के बिना व्यक्ति भले ही दिनों दिन तक जीवित रह ले, परंतु प्यास लगने पर एक पहर भी ...

प्रकृति मैम - छू सको तो छू लो
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 678

छू सको तो छू लोजिस लड़के को मैं स्टेशन से ले आया था उसे कुछ समय बाद उसके चाचा का पत्र आ जाने पर मैंने कुछ पैसे देकर, बिहार ...

प्रकृति मैम - लहर को प्यास से क्या
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 655

 लहर को प्यास से क्याकुछ पत्रिकाएं दीवाली पर साहित्य के ख़ास अंक भी निकाला करती थीं। "सबरंग" के कहानी विशेषांक के लिए नई कहानी ढूंढने के लिए एक दिन ...

प्रकृति मैम - पास भी, दूर भी
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 846

ठाणे मुंबई के पास बिल्कुल सटा हुआ जिला था। वहां लोग कहते थे कि यहां व्यस्ततम विराट महानगर मुंबई की असुविधाएं अभी नहीं पहुंची हैं पर सुविधाएं पहुंच गई ...

॥धूणी॥
द्वारा Yayawargi (Divangi Joshi)
  • 648

॥धूणी॥कोई प्रेम-कहानी होगी किसी लड़की की, जिसका नाम धुणी होगा या शायद कोई लड़का है जिसको किसी लड़की की धून लग गयी है यह समज आए हो तो यही ...

तरीका
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 782

     मैं फ्री होकर बैठी ही थी कि एक महीन सी आवाज़ आयी... "मैडम..! मे आई गेट इन?" वह कॉमर्स की एक स्वीट सी छात्रा थी, मुझे नाम ...

मासूम सपने
द्वारा Pallavi Saxena
  • 807

सरकारी स्कूल के बच्चों को मोबाइल के लिए लड़ते देख विज्ञान के मास्टर जी बोले चलो बच्चों आज हम विज्ञान के विषयों के बारे में चर्चा करेंगे। आज उसके ...

प्रकृति मैम - विकल्पों की मौजूदगी
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 576

15. विकल्पों की मौजूदगीमेरे घर से थोड़ी ही दूर पर एक मकान में तीन लड़के रहते थे, जो कोल्हापुर में एम बी ए करने आए हुए थे।मेरे सभी मित्र ...

प्रकृति मैम - ठिकाने, ज़ायके, पोशाक
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 578

ठिकाने ज़ायके पोशाकजब हम घर से कहीं बाहर जाने के लिए निकलते हैं तो एक उलझन मन ही मन हमें बेचैन करती रहती है। हम सोचते हैं कि दुनिया ...

प्रकृति मैम - दिल्ली
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 901

.दिल्ली दिल हिंदुस्तान कालोधी रोड वाला मकान काफ़ी छोटा था। लेकिन जल्दी ही हमें साकेत में बड़ा मकान मिल गया।पत्नी का ऑफिस आर के पुरम में था और मेरा ...

प्रकृति मैम - राजपथ
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 807

12. राजपथकुछ दिन बाद डाक के लिफाफे में बंद मेरी उस परीक्षा का परिणाम आया जो मैंने पिछले दिनों दी थी। मुझे साक्षात्कार के लिए चुन लिया गया था।ये ...

प्रकृति मैम - मिलके बिछड़ गए दिन
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 809

 मिलके बिछड़ गए दिन !दादर में एक दिन एक कार्यक्रम था। किशन कुमार केन मुझसे बोले- आपको साथ में लेकर चलूंगा।किशन कुमार केन उन दिनों मुंबई में एक प्रिंटिंग ...

थैंक्स मम्मी-डैडी
द्वारा राकेश सोहम्
  • 841

छेड़छाड़ के बाद खुदकशी – दैनिक अखबार के मुख्य पृष्ठ पर प्राथमिकता से छपे शीर्षक को पढ़कर मिनी बेचैन हो उठी. जब भी वह ऐसे समाचार सुनती या पढ़ती ...

बेहतर कल
द्वारा Rajesh Kumar
  • 886

"कल" वो शब्द है जिसका अस्तित्व है या नही कहा नही जा सकता। "कल" हर व्यक्ति के दिलों दिमाग में रहता है और हर दिन सोचता है कि उसका ...

किस्मत - 2
द्वारा Akshay jain
  • 772

             किस्मत भी बड़ी अजीब चीज होती है। जिसकी चमक जाए उसे खजूर के पेड़ पर चढ़ा देती है। और जिसकी ना चमके उस कीचड़ ...

किस्मत - 1
द्वारा Akshay jain
  • 804

किस्मत नाम कि वस्तु से आप सभी परिचित ही होंगे। आज के समय में अनेक लोग अपनी किस्मत पर ही टिके हुए हैं।अनेक लोग अपनी किस्मत को आजमाते रहते ...

शॉपिंग की बीमारी
द्वारा r k lal
  • (21)
  • 940

शॉपिंग की बीमारीआर 0 के 0 लाल"चलो तैयार हो जाओ।  तुम्हारा सामान लेकर आते हैं। ध्यान रहे हार बार की तरह फालतू सामान लेने की जरूरत नहीं है। लिस्ट ...