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उजाले की ओर - 3
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर -- 3 ------------------   स्नेही एवं प्रिय मित्रों       सभीको मेरा नमन      यह संसार एक बहती नदिया है जिसमें सभीको हिचकोले खाने हैं ,कोई तैर ...

जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान
द्वारा Rajesh Maheshwari

जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान                                                               मोहनियां गांव का रामसिंह, एक सम्पन्न किसान था। घर में पत्नी, एक नौजवान बेटा और एक बेटी थी। बेटे ने इसी साल कालेज जाना ...

 वर्तमान समाज में नारी की सम्मानजनक स्थिति
द्वारा Dr kavita Tyagi

       वर्तमान समाज में नारी की सम्मानजनक स्थिति     वर्तमान भारतीय समाज में स्त्रियों के प्रति सम्मान भाव का अध्ययन-विश्लेषण करते हैं , तो पता चलता है ...

बारबाला
द्वारा Rajesh Maheshwari

बारबाला                                                                जीवन में गरीबी देती है अभाव, चिन्ता और परेशानियां। परन्तु आशा की किरणें, सच्ची लगन और परिश्रम से जीवन संवर जाता है। वाराणसी की तंग गलियों में ...

धड़कनों में तुम बसे
द्वारा Dr Vinita Rahurikar

धड़कनों में तुम बसे... दरवाजे के अंदर पैर रखते ही हर बार की तरह ही अनिरुद्ध के दिल की धड़कन  अनियंत्रित हो गई। पैरों में अजीब कंपकपी सी आने लगी। ...

आस्था के दो ध्रुव
द्वारा Dr kavita Tyagi

                                 आस्था के दो ध्रुव      भारतीय उपमहाद्वीप में हिन्दू धर्म और इस्लाम ...

डोर (धर्म और कर्म की)...
द्वारा सिमरन जयेश्वरी

वो आज खुद को आईने के सामने बेठ के निहारे जा रही थी।आज उसकी चेहरे की चमक एसी थी की उसके आगे चाँद की चांदनी भी फीकी पड़ जाये। ...

बटवारा
द्वारा Rajesh Maheshwari

बटवारा           नागपुर में सेठ करोड़ीमल नाम के एक बड़े उद्योगपति रहते थे। उनके पास खेती की काफी जमीन भी थी। पत्नी का देहान्त हो चुका था। ...

उजाले की ओर - 2
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर-2 -----------------        बात शुरू करती हूँ इस अजीबोग़रीब समय से जिसे न किसी ने आज तक देखा ,न सुना ,न जाना ,न पहचाना --बस ,एक ...

सुबह के चार बजे
द्वारा Krishna Timbadiya

में हमेशा से लिखना और पढ़ने पसंद करती हूं। मेरे पढने के अनुभवों के बाद मेंने लिखना शुरू किया। कुछ कहानियों को मैंने अपने निजी ज़िंदगी से जोड़ के ...

कलाकार
द्वारा Rajesh Maheshwari

कलाकार     मोहनसिंह बचपन से ही कलात्मक अभिरूचि का था और दूसरों की नकल करना उसका प्रमुख खेल था। जब वह पाठशाला जाने लगा तो उसके शिक्षकों ने ...

एक कबूतरी का मदर्स डे
द्वारा Archana Anupriya

           "एक कबूतरी का मदर्स डे"आसमान में काले बादल उमड़ घुमड़ रहे थे। तेज हवाएँ एक अजीब सी आवाज के साथ आँधी का रूप ले चुकी थीं। अपार्टमेंट के ...

दो किलो आम का मूल्य
द्वारा Kalyan Singh

जैसा कि  गर्मी का मौसम था तो दिनेश ड्राइवर ने पहले से ही कार का A .C  चालू रखा था। वो मेरे व्यवहार से पूरी तरह वाकिफ़ था कि ...

माँ
द्वारा Rajesh Maheshwari

माँ           श्यामा सुबह-सुबह नहा-धोकर एक लोटे में जल और डलिया में फूल लेकर मन्दिर चली जा रही थी। यह उसकी प्रतिदिन की दिनचर्या थी। अचानक उसे ...

उजाले की ओर
द्वारा Pranava Bharti

1-उजाले की ओर   ----------------- मित्रों ! प्रणाम  जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता ...

मोबाइल की जान और शान
द्वारा r k lal

मोबाइल की जान और शान आर 0 के 0 लाल                     सौरभ की शादी एक साल पहले हुयी थी । उसकी पत्नी रोज सुबह रोमांटिक तरीके से उसे ...

मैं टूटकर नहीं बिखरूंगा
द्वारा Saroj Prajapati
  • 351

रात को धड़ाम की आवाज से सुषमा की आंख खुली। उसनेे लाइट जला कर देखा तो उसके पति तो वहीं सो रहे थे लेकिन बेटा वहां नहीं था। रात ...

किसान
द्वारा Rajesh Kumar
  • 245

हमारे देश कृषिप्रधान देश है, लगभग 60% समाज कृषि पर जीवनयापन करता है। कहते है 17वीं शताब्दी तक भारत की कृषि व्यवस्था बहुत दुरूस्त थी जिससे किसान स्वावलंबी थे ...

स्वाधीन वल्लभा
द्वारा Geeta Shri
  • 423

स्वाधीन वल्लभा गीताश्री प्रेम के आस्वाद के लिये शब्दों की भला क्या जरूरत? शायद दुनिया की तमाम भाषायें, प्रेम के किसी हिमनद से निकली होंगी। एक दुभाषिये के तौर ...

जीवन सलामती के तीन पहेलु
द्वारा Bambhaniya Sunil
  • 205

                         कोरोना वायरस महामारी अपने भारत देश में ही नहीं किन्तु पूरी दुनिया में फैली हुई है। दिन ...

गुरु
द्वारा Pranava Bharti
  • 388

गुरु  ------    भोर की सुनहरी रूपाली किरणें अनु के मन में एक नया संदेश प्रसरित करती हैं।बड़ा भला लगता है उसे ब्रह्म मुहूर्त के सूरज से कानाफूसी करना ...

अनजान देवदूत
द्वारा pratibha singh
  • 346

                      रहस्मयी सेंटामैं मरना चाहती हूँ। कुछ भी तो नही बचा जीने के लिए।गरीबी में पैदा हुई। माँ बाप बेहद गरीब थे। मैं उनकी इकलौती सन्तान थी। घर की हालत ...

कैसी मैकलिस्टर - अन्तर्द्वन्द और जीत
द्वारा Abhishek Sharma - Instant ABS
  • 187

प्रिय पाठकों, होंसला मन से उत्तपन्न वह भाव है जिसके बूते व्यक्ति समुद्र की अन्नत गहराइयों में खोई गयी सुई ढूंढने का भी माद्दा रखता है। होंसला वह इच्छा ...

Tik Tok Hua Ban
द्वारा Ankit Chaudhary
  • 721

      लोगो की आदत बन गया था एक चाइना का फचरा , जिसे हम सब लोग टिक टोक के नामसे जानते थे। आज हमारी भारतीय गवर्नमेंट चाइना ...

निस्वार्थ सेवा
द्वारा RAJESH MAHESHWARI
  • 253

निस्वार्थ सेवा     कुछ वर्ष पूर्व गुजरात राज्य में भीषण अकाल पड़ा था जिसमें मानव के साथ साथ जानवर भी भोजन के अभाव में काल कलवित हो रहे ...

साझी जिम्मेदारी
द्वारा Saroj Prajapati
  • (26)
  • 693

शाम को सुरभि जब ऑफिस से घर लौटी तो उसकी बुआ सास आई हुई थी। उसने अपना सामान रख, अपनी सास व बुआ सास के पैर छूकर उनका हालचाल ...

पति को सीखाऊंगी
द्वारा Jitendra Shivhare
  • 533

एक कहानी रोज़--50    *पति को सीखाऊंगी*      *'पढ़ी-लिखी* हो तो क्या अपने पति को समझाओगी!' डिटर्जेंट पावडर विज्ञापन का यह संवाद घर-घर में सुनाई दे रहा था। ...

अंतिम इच्छा
द्वारा Rajesh Maheshwari
  • 553

                                                अंतिम इच्छा   राजा विक्रम ...

विवाद
द्वारा JYOTI PRAKASH RAI
  • 299

बात चाहे जो भी हो बहस उसे विवाद तक लाकर खड़ा कर देती है। और विवाद का परिणाम हमेशा बुरा ही साबित हुआ है, विवाद अपनों को ही निगल ...