सर्वश्रेष्ठ मानवीय विज्ञान कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

बिटिया के नाम पाती... - 4 - एक पाती खुद के नाम
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 148

प्रिय वन्दूआज ज़िन्दगी के सफर में चलते चलते उस पड़ाव पर पहुँच चुकी हूँ, जहाँ से अतीत और भविष्य एक साथ नज़र आता है। ज़िन्दगी के गलियारे में झाँकते ...

बिटिया के नाम पाती... - 3
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 206

प्रिय पापा,स्नेह वंदनकहते हैं कि एक लड़की को खुद माँ बनने के बाद ही माँ की भावनाएं समझ में आती हैं और एक लड़का पिता बनने के बाद ही ...

बालश्रम
द्वारा Rajesh Kumar
  • 184

पूरे विश्व में बाल श्रम को रोकने के कड़े से कड़े कानून बनाये गए, बहुत से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बाल श्रम के खिलाफ जनजागरण किया बहुत अच्छे परिणाम भी ...

द चोजन वन
द्वारा Dipti Methe
  • 258

                               द चोज़न वन...!               क़रीब सालभर बाद मैं अपने ...

मानवता की जीवित लाश
द्वारा Apurva Raghuvansh
  • 174

हाय रे मानव! जातिक्या हो गया है तुझकोतू तो ऐसा नहीं था,फिर तुझको क्या हो गया है।आओ देखें मिलकर हम इस बार कब तक जीवित रहती है यह लाश,सुनने में ...

अरेंज मैरिज
द्वारा Kumar Gourav
  • 339

" बधाई हो आप बाप बनने वाले हैं । " सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने उत्साह से पूछा "कब? " डॉक्टर मुस्कुराई " बस चार महीने और इंतजार ...

प्रतिबिंब
द्वारा Dipti Methe
  • 262

                                          अर्थ 2.0             2099 ...

और वो चला गया
द्वारा Pallavi Saxena
  • 561

एक और सितारा खो गया। अभी उम्र ही क्या थी उसकी अभी जीवन चलना शुरू ही हुआ था। अभी इतनी जल्दी कैसे हार मान सकता था वो...?  इतना भी ...

हरामी
द्वारा Kumar Gourav
  • 518

हरामीसर्दी के मौसम में बस यात्रा में बदन सिकोड़े चुपचाप लघुशंका दबाए बैठा था । ड्राइवर ने ठेके पर दारू के लिए बस रोकी और मैं जल्दी से शंका ...

सोशल मीडिया प्रदूषण (सोशल साइटों से प्रभावित मानव जीवन)
द्वारा RAM NIVAS VERMA
  • 420

S.M. POLLUTION राइटर - राम निवास वर्मा विषय - सोशल मीडिया विचार, हिंदी आर्टिकल वातावरण में अचानक परिवर्तन होने से मनुष्य और जीव – जंतुओं का जीवन बहुत प्रभावित ...

लाश
द्वारा Devendra Prasad
  • 498

इस संसार में अगर को सत्य बात है तो वह है मृत्यु / एक न एक दिन सभी की मृत्यु आनी ही है चाहे कोई पशु हो पक्षी हो ...

अश्लीलता
द्वारा Rajesh Kumar
  • 1.1k

 सामाजिक तौर पर अश्लील शब्द नकारात्मकता का सूचक है  अश्लील शब्द उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जिस का चरित्र काम वृत्ति प्रधान हो वह भी सामाजिक माहौल ...

हाँ... नपुंसक हूँ मैं
द्वारा राजीव तनेजा
  • 626

“हाँ...नपुंसक हूँ मैं”बचाओ...बचाओ...की आवाज़ सुन अचानक मैं नींद से हड़बड़ा कर उठ बैठा। देखा तो आस-पास कहीं कोई नहीं था। माथे पर उभर आई पसीने की बूँदें चुहचुहा कर ...

मरना भी एक कला है
द्वारा Satish Sardana Kumar
  • 987

 मरना भी एक कला है।भग्गू मरा तो पता चला।जैसे वह खामख्वाह जी रहा था वैसे ही एक दिन खामख्वाह मर गया।वरना मैंने इस तरह से आदमी मरते देखें हैं ...

क्यूं मुश्किल में जान फसाये है
द्वारा Ajay Kumar Awasthi
  • 583

     चमगादड़ एक ऐसा जीव है,जो रात के अंधेरे में उड़ता है,और जब सब जानवर सो रहे होते हैं, वो चुपके से उनके किसी नाजुक जगह को अपनी ...

चरित्र का चरित्रचित्रण
द्वारा Shakuntala Sinha
  • 730

                                   आलेख - चरित्र का चरित्रचित्रण    किसी भी शब्दकोष में चरित्र के अनेकों अर्थ मिलेंगे -   विशेषता , स्वरूप , अक्षर , पात्र , कीर्ति , ख्याति ,लक्षण, ...

एक पाती दामाद के नाम
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 851

                                   प्रिय क्षितिज,          असीम स्नेहाशीष         तुम अवश्य ...

सुंदरता क्या है
द्वारा Shakuntala Sinha
  • 612

                                                          ...

बिटिया के नाम पाती... - 2
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 662

प्यारी बिटियाढेर सारा प्यार      तुमने कहा था कि मेरा पहला पत्र तुम्हें बहुत अच्छा लगा और यह भी कि फोन पर चाहे कितनी भी देर बातें कर ...

बिटिया के नाम पाती... - 1
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 840

प्यारी बिटियाढेर सारा प्यार        मेरा पत्र पाकर तुम आश्चर्यचकित होंगी कि अभी तो मिलकर गयीं हैं मम्मा और रोज तो मोबाइल पर बात होती है, फिर ...

दुष्कर्म के लिए बदला या इंसाफ
द्वारा Ajay Kumar Awasthi
  • 885

     मारियो फुजो का सुप्रसिद्ध उपन्यास गाडफादर पर हालीवुड में सन 72 में गाडफादर के नाम से फिल्म बनी, जो सुपर डुपर हिट हुई . इस फिल्म के बाद ...

सास भी कभी बहू थी
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • (14)
  • 6.6k

       आज सरू जितनी खुश है उतनी ही उदास भी... जितनी उत्साहित है उतनी ही हताश भी... जितनी अतीत में गोते लगा रही है उतनी ही भविष्य ...

लो फिर से चांडाल आ गया
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 837

(१)  ये एक नकारात्मक व्यक्ति के बारे में एक नकारात्मक कविता है। चाहे ऑफिस हो या घर , हर जगह नकारात्मक प्रवृति के लोग मिल जाते है जो अपनी ...

वैज्ञानिक साहित्य
द्वारा Shailendra Chauhan
  • 880

शैलेन्द्र चौहान यथार्थ का चित्रण, वैज्ञानिक साहित्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष है और उसका वैचारिक प्रतिफलन हमें रिपोर्ताज, डायरी, लेख, राजनीतिक आलेख इत्यादि में देखने को मिलता है। हिन्दी ...

क्या है मतलब का मतलब?
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 1k

अजीब विरोधाभास है शब्दों में। अजीब द्वंद्व है शब्द भरोसे में, विश्वास में, आस्था में, घृणा में, प्रेम में। दरअसल शब्दों का कार्य है एक खास तरह के विचार को ...

गलतफहमी
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 952

        सर्दी की दोपहर सिया को हमेशा ही अनोखे अहसास कराती है, पहले सिर्फ गुदगुदाती थी, अब कभी कभी उदास कर देती है। आज सुबह से ...

गूंगा, बहरा, अंधा
द्वारा Manjeet Singh Gauhar
  • 1.5k

ये कहानी हमारे राष्ट्रीय पिता श्री महात्मा गॉंधी जी की और उनके तीन बन्दरों से मिली शिक्षा की है। वे बन्दर जिनका जैसचर(बॉडी स्टाइल) हमें बहुत अच्छा ज्ञान सिखा-कर ...

अफवाह, भय और आक्रामकता
द्वारा Ajay Kumar Awasthi
  • 730

*अफ़वाह,भय और आक्रामकता*   इन दिनों मॉब लिचिंग की चर्चा है भीड़ द्वारा हिंसा । यह बहुत भयावह है कि किसी अजनबी पर सन्देह हो जाय और उसे भीड़ के ...

इतने बूढ़े भी नहीं कि न समझे
द्वारा r k lal
  • (26)
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इतने बूढ़े भी नहीं कि न समझे                                    आर 0 के 0 लाल   एक बेटे ने अपने पिता को निर्देश दिया कि उसके कुछ दोस्त आज उससे मिलने ...