श्रेष्ठ हिंदी कहानियां पढ़ें और डाउनलोड करें

चंद्रकांता - संपूर्ण
द्वारा Devaki Nandan Khatri
  • (51)
  • 628

चंद्रकान्ता हिन्दी के शुरुआती उपन्यासों में है जिसके लेखक देवकीनन्दन खत्री हैं। इसकी रचना १९ वीं सदी के आखिरी में हुई थी। यह उपन्यास अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था और ...

प्रेमचंद की बेनमून लघु कहानियाँ
द्वारा Munshi Premchand
  • (25)
  • 494

प्रेमचंद की बेनमून लघु कहानियाँ 1. ईदगाह 2. नमक का दरोगा 3. पूस की रात 4. शतरंज के खिलाड़ी

श्रीकांत - संपूर्ण
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
  • 233

श्रीकांत बचपन से ही धुन के धनी और मस्तमौला थे। किसी के साथ या एक ही जगह लंबे समय तक रहना उन की प्रकृति के विरुद्ध था। बचपन में ...

वीरों की गाथा
द्वारा Kamini Gupta
  • 152

story for competition (untold war stories)

लगे नाचने अक्षर
द्वारा manohar chamoli manu
  • 194

लगे नाचने अक्षर -मनोहर चमोली ‘मनु’ वेलिया ने स्कूल से मिला होमवर्क पूरा किया। स्कूल बैग खोला। पेंसिल-काॅपियां रखकर वह खेलने चली गई। वेलिया के जाते ही अक्षर और पेंसिल ...

मारे गये गुलफाम
द्वारा Phanishwar Nath Renu
  • (25)
  • 202

मारे गये गुलफाम एक कहानी है जिसके रचायिता फणीश्वर नाथ रेणु हैं। इसपर हिन्दी में एक फिल्म तीसरी कसम बनाई गई है

पुरानी कहानी
द्वारा Phanishwar Nath Renu
  • (21)
  • 145

पुरानी कहानी: नया पाठ फणीश्वरनाथ रेणु बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन - तूफान - उठा! हिमालय की किसी चोटी का बर्फ पिघला और तराई के घनघोर जंगलों के ऊपर ...

पिछली सदी की पोटली
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 86

सल्तनत तेज़ी से कदम बढ़ाती हुई चल रही थी। उसे पांच बजकर नौ मिनट तक हर हालत में घर पहुंचना था, क्योंकि गजराज ठीक पांच दस पर उसे बधाई ...

घडी - दी टाइम इज रनिंग आउट
द्वारा Prashant Vyawhare
  • 66

“घडी” दी टाइम इज रनिंग आउट   By Prashant Vyawhare   ! यह कहानी समर्पित है उस वीर जवानो और मेहनती किसानो को जो आज हमारे देश की धड़कन ...

सच्चे दिल की पुकार
द्वारा Rinkal Raja
  • 104

हमारे इस जहा में कई किषम के लोग है...! जैसे की कोई आलसी है तो कोई अपने काम में चुस्त...! और कोई कपटी है तो कोई प्रमाणिक...! इस जहा में ...

बेकिंग
द्वारा MB (Official)
  • 120

पपीते के टुकडों को ब्लान्च करें: पपीते के टुकडों को उबलते पानी में 3 मिनट तक उबाल लें. अब गैस बंद करके उन्हें इसी पानी में 5 मिनट के लिए ...

समय
द्वारा Sarvesh Saxena
  • (14)
  • 74

रोज की तरह आज भी दोपहर 1:00 बजे ऑफिस में लंच टाइम हो चुका था पर श्रवण अपनी टेबल पर हाथ में कोरा कागज और पेन पकड़े न जाने ...

हादसा
द्वारा Vrishali Gotkhindikar
  • (12)
  • 81

जिंदगी क्या है कोई नही जान सकता यूँही ख़ुशी ख़ुशी चलते चलते अचानक एक मोड़ पर जिंदगी में हादसा आ जाता है और फिर ...

रसप्रिया
द्वारा Phanishwar Nath Renu
  • (32)
  • 141

रसप्रिया - (फणीश्वरनाथ रेणु) धूल में पड़े कीमती पत्थर को देख कर जौहरी की आँखों में एक नई झलक झिलमिला गई - अपरूप-रूप! चरवाहा मोहना छौंड़ा को देखते ही पँचकौड़ी मिरदंगिया ...

प्यार….. इस शहर में
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 94

प्रिय यशी हाय ! कैसी हो ? हम लोग मेल से, मोबाइल से व वॉट्स एप से कितनी बातें करते रहते थे और हमारे बीच लंबा मौन बिछ गया. मैं जानती ...

अकेला
द्वारा Vrishali Gotkhindikar
  • (12)
  • 108

एक सपना देखा था ,लगता था जिन्दगी खुशहाल होगी ..मगर जाने क्या हुआ देखते देखते सपना चूर चूर हो गया शायद भगवान् की मर्जी नही थी ,इसलिए ये ...

शिकंजा
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 107

यही कोई दो- पांच साल हुए हैं जब इस गांव में भी बीसवीं सदी ने पांव धरे हैं। बच्चों के लिए छोटी सी पाठशाला बन गई है। बरसों से ...

इश्क़ इबादत
द्वारा Devendra Prasad
  • (40)
  • 81

मैं कैसे भूल सकता हूँ वो कॉलेज का पहला दिन। ठंड का मौसम और धुंध। मैं। जा रहा था अपने कॉलेज बस की ओर। बस रोजाना की तरह अपने ...

रुख़सार,,
द्वारा Nirpendra Kumar Sharma
  • 95

साल 1992 उत्तरप्रदेश का एक छोटा सा गांव -अम्मी,, अम्मी आप समझाइये ना अब्बू को,,, रुखसार अपनी बड़ी-बड़ी काली आंखों में मोटे-मोटेआंसू लिए अपनी अम्मी के पीछे-पीछे डोल रही ...

बवण्डर वाला भूत
द्वारा Devendra Prasad
  • (61)
  • 104

भूतों पर अक्सर हम सबने इस बात की बहुत चर्चा सुनी है कि भूत होते हैं या फिर नहीं। कुछ लोग इसे मजह वहम या फिर मनगढ़ंत कहानी मानते ...

नर या मादा
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 84

(१)    माना कि समय के साथ बदलना वक्त की मांग है . पर आधुनिकीकरण और फैशन के नाम पे किसी तरह का पोशाक धारण करना , किसी तरह के ...

कुचक्
द्वारा Vk Sinha
  • (17)
  • 115

          ? कुचक्र ?  अजय श्रीवास्तव अपनी ही धुन के पक्के पर सरल स्वभाव के एक स्वाभिमानी इंसान थे। परिवार में दो बेटियां इंदू और ...

तेरा घमंड
द्वारा Manjeet Singh Gauhar
  • 120

मत कर इतना घमंड , ऐ तू ना-समझ इंसानतेरा घमंड ही एक दिन तुझे हरायेगा ।मेरा बारे में तू सोचना छोड़ देमैं क्या हूँ , ये तुझे वक़्त बतायेगा ...

उम्मीद
द्वारा SARWAT FATMI
  • (11)
  • 133

ज़ख़्म ज़ख़्म दिल की किसे दिखाऊ में जो मेरा था वो मेरा हुआ नहीं और लोगों ने तो युही मेरा मज़ाक बनाते चले गये सोचा कभी होंगी उन्हें मेरी ...

रबीन्द्रनाथ ठाकुर की चुनी हुई कहानियाँ
द्वारा Rabindranath Tagore
  • (15)
  • 45

रबीन्द्रनाथ ठाकुर की चुनी हुई कहानियाँ 1. अनमोल भेंट 2. अंतिम प्यार से 3. अपरिचिता 4. कवि का हृदय 5. गूंगी

मुन्ना
द्वारा Vrishali Gotkhindikar
  • (20)
  • 105

प्यार एक भावना होती है जो बहोत पवित्र है प्यार सिर्फ प्रेमीको के बीच नहीं होता इसके कई रूप होते है भगवानसे भक्त का प्यार ,माँ ...

Bundelkhand ka Mahanayak - Chhatrasaal
द्वारा Mrityunjaya Dikshit
  • (40)
  • 72

7 twu ij fo”ks’k %& cqansy[kaM dk egkuk;d %& N=lky Ek`R;qat; nhf{kr Hkkjr dh /kjrh ohjksa dh /kjrh gSA Hkkjr dk dksbZ Hkh HkwHkkx ,slk ugha gS tgka ij ...

एक तरफा प्यार
द्वारा Anubhav verma
  • (44)
  • 83

जो लोग एक तरफा प्यार करते है अपनी ज़िन्दगी को खुद बर्बाद करते है ! नहीं मिलता बिना नसीब के कुछ भी, फिर भी लोग खुद पर अत्याचार करते है !! जमीर हमसे ...

बिखरे सपने
द्वारा Manish Gode
  • 62

ये कहानी एक ऐसी बंजारन की है, जो लीक से हट कर, थोड़ी महत्वाकांक्षी है... उसे औरों की तरह पिटी-पिटाई जिंदगी नहीं जीनी है... पढ़िए क्या उसके देखे सपने ...

फरिश्ता
द्वारा Nirpendra Kumar Sharma
  • 70

आज रमेश का कॉलेज में आखिरी दिन था। लेकिन उसने गांव न जाकर यहीं शहर में ही कोई नोकरी करने का फैसला किया था। उसने एक दफ्तर में नोकरी ...

पिनकोड
द्वारा महेश रौतेला
  • 70

पिनकोड:मैं किसी काम से हल्द्वानी बाजार गया था। बस स्टेशन से गुजर रहा था, नैनीताल की बस पर नजर पड़ी, सोचा नैनीताल घूम कर आऊँ। बिना उद्देश्य कहीं जाना ...

नन्हा फौजी
द्वारा Vanita Thakkar
  • (12)
  • 116

जननी जन्मभूमि के प्रति अचल निष्ठा, देश के रक्षण को सर्वस्व समर्पित करने वाले सैनिकों का सर्वाधिक शक्ति-सम्पन्न अमोघ अस्त्र है । इस अमोघ अस्त्र से सुसज्जित, बड़ा हो कर ...

नैना जोगिन
द्वारा Phanishwar Nath Renu
  • (19)
  • 145

रतनी ने मुझे देखा तो घुटने से ऊपर खोंसी हुई साड़ी को कोंचा की जल्दी से नीचे गिरा लिया। सदा साइरेन की तरह गूँजनेवाली उसकी आवाज कंठनली ...

दाग...
द्वारा Sarvesh Saxena
  • (19)
  • 86

"मैं नहीं जाऊंगी, बोल दिया ना, फिर क्यों बार-बार तुम लोग मुझसे पूछते हो", कहकर गरिमा आज फिर अपने कमरे में चली गई, उसकी सहेलियां चुपचाप घर से बाहर ...

एक अपवित्र रात (विश्वकथाएं)
द्वारा MB (Official)
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  • 136

एक अपवित्र रात (विश्वकथाएं) 1. एक अपवित्र रात 2. प्रेमिका को सलाह 3. स्वागत-रोमन शैली 4. आत्मस्वीकृति 5. तीन दिलचस्प किस्से 6. नंगा लड़का 7. मुकाबला

भुतनी का बदला
द्वारा PAWAN KISHOR
  • (49)
  • 54

This is a horror story that name Bhootni Ka Badla in this story Main character Ram ,Shyam, rock and Varsha this is story based on Revenge of chudail IS ...

माँ
द्वारा Rajesh Maheshwari
  • (13)
  • 58

माँ           श्यामा सुबह-सुबह नहा-धोकर एक लोटे में जल और डलिया में फूल लेकर मन्दिर चली जा रही थी। यह उसकी प्रतिदिन की दिनचर्या थी। अचानक उसे ...

कसक प्यार की
द्वारा Abhishek Hada
  • (17)
  • 100

सबसे पहले तो मेरे सभी पाठको को हृदय से धन्यवाद | मेरी पुरानी हवेली का राज़ कहानी को इतना प्यार देने के लिए उसी की वजह से मैं लगातार ...

तो
द्वारा Ankita Bhargava
  • (31)
  • 77

संजना जब तक अपना नाश्ता लेकर आई राज ऑफिस के लिए निकल चुके थे, आज फिर संजना डाईनिंग टेबल पर अकेली बैठी प्लेट में चम्मच घुमा रही थी। उसे ...

ईश्वर तू महान है
द्वारा Abhishek Hada
  • 98

गाँव की कच्ची सड़क। तेज धूप। दोपहर का समय। तन को झुलसाती गर्म लू। दूर दूर तक किसी छायादार पेड़ का नामोनिशान नही। सड़क के दोनो तरफ कुछ हरी ...

कुर्सी
द्वारा Pradeep Kumar sah
  • 95

उसकी लिखावट भी अच्छी नहीं थी. इसलिये उन्हें पूरा यकीन था कि वह बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सकता. वैसी स्थिति में वह नहीं चाहते थे कि विद्यालय ...

और वह मर गयी
द्वारा Nirpendra Kumar Sharma
  • (21)
  • 82

नदी किनारे गांव के एक छोर पर एक छोटे से घर में रहती थी गांव की बूढी दादी माँ। घर क्या था ,उसे बस एक झोंपडी कहना ही उचित ...

सज़ा
द्वारा Sarvesh Saxena
  • (13)
  • 88

आज कोर्ट में केस की आखिरी सुनवाई है, आज अदालत अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी कि क्या होगा, मिस्टर वेद को सजा-ए-मौत मिलेगी या जिंदगी कोई नहीं जानता, खुद वेद ...