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अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - भाग 26
द्वारा Mirza Hafiz Baig

अब तक आपने पढ़ा... “तुम्हे क्या हुआ है?” व्यापारी ने आश्चर्य से पूछा, “अभी तो कथा में हृदय विदारक पल आयेंगे। तब तुम क्या करोगे?”“मुझे अपनी पत्नि की याद ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 15
द्वारा harshad solanki

जब हम ज़र्रे से पानी भरकर वापस लौट रहे थे, तब मार्ग में हमें पंद्रह बीस मीटर के फासले पर पेड़ों के पीछे से किसी प्राणी के ग़ुर्राने की ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - भाग 25
द्वारा Mirza Hafiz Baig

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि व्यापारी की पत्नि को एक रहस्यमय रोग हो गया। क्या वह रोग है अथवा नहीं? क्या उसका कोई निदान है? और आगे क्या ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 14
द्वारा harshad solanki

जब तक वे याट पर पहुँचे तब तक साम हो गई थी. उन्होंने अब तै किया कि अब वे पूरे साजो सामान के साथ चलेंगे और मेघनाथजी की बताई ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - भाग 24
द्वारा Mirza Hafiz Baig

अबतक आप ने पढ़ाव्यापारी अपनी पत्नी के साथ अपने परिवार के बीच पहुंचता है। आगे...अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - भाग 24हाँ भी और ना भी     अतीत की ...

दोस्त की जुबानी
द्वारा महेश रौतेला

दोस्त की जुबानी:बचपन में एक बार हल चलाने का शौक हुआ।अतः सुबह उठकर हाथ मुँह धो, बैलों को खेत में ले गया।वातावरण खुशनुमा था।घराट पर दो लोग आ चुके ...

बंशो मुझे अच्छी लगने लगी
द्वारा राजनारायण बोहरे

कहानी                            बंशो मुझे अच्छी लगने लगी    राजनारायण बोहरे   प्रिय सुरेश,                               ये क्षेत्र छत्तीसगढ़ कहलाता ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 13
द्वारा harshad solanki

आखिर वे उस द्वीप के नजदीक पहुँच गए. अभी किनारा काफी अंतर पर था. दूर से देखा, द्वीप घने जंगलों से भरा पड़ा था. लगता था, यह द्वीप मानव ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - भाग 23
द्वारा Mirza Hafiz Baig

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि व्यापारी ने अपनी कथा में बताया कि अभियान सहायक ने किस तरह अपने अनुभवों की कथाओं द्वारा व्यापारी की शंकाओं का समाधान करने ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 12
द्वारा harshad solanki

नानू: "ये तस्वीरें तो एक भरम मात्र है. मगर असल बात कुछ और ही है." इतना कहते हुए नानू बड़े रहस्यमय तरीके से हंसा. नानू की ऐसी भेदभरी हंसी ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग -22
द्वारा Mirza Hafiz Baig

पिछले भाग में आपने पढ़ा- अपने मित्र गेरिक, अभियान सहायक और सेनापति के राजनीतिक षड्यंत्रो से व्यापारी क्षुब्ध है। क्या उसकी शंकाओं का निवारण होता है? आगे कहानी क्या ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 11
द्वारा harshad solanki

पर सेठ के लड़के को यह कहाँ पता था, कि उसने इस तरह वापस पलट कर बहुत बड़ी गलती कर दी थी! जैसे वह पलता नहीं था! उसके नसीब ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - भाग - 21
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 132

अब तक आपने पढ़ा... जासूस की पीठ पर वात्सल्य से हाथ फेरते हुये उसे सजा से बचाने की कोशिश करते हुये अचानक उसे षड्यंत्र पूर्वक मार दिया गया। व्यापारी ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 10
द्वारा harshad solanki
  • 422

अपरिचित लोगों को दरवाजे पर खड़े देखकर उनके चेहरे पर प्रश्न भाव उभर आए. राजू: "नमस्ते आंटीजी! क्या हम नानू से मिल सकते हैं?" औरत: "जी. आप घर में ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग -20
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 253

अब तक आपने पढ़ा- किस प्रकार षड्यंत्र करके जासूस ने व्यापारी को अपने प्रेम के रास्ते से हटाने के लिये नस्लवादी विचारों के सहारे, सेना का विद्रोह खड़ा करने ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 9
द्वारा harshad solanki
  • 445

इस आपरेशन में समुद्री लुटेरों एवं अन्य दुश्मनों से भेंट होने की संभावना भी पुरी थी. उसके लिए बंदूकों, गोलियों और अन्य हथियारों की आवश्यकता रहती थी, पर वह ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 8
द्वारा harshad solanki
  • 517

"अच्छा! वो क्या!?" जेसिका ने खुश होते हुए बड़ी बेताबी से पूछा. इसके उत्तर में राजू कहने लगा. "जब नानू ने उस तस्वीर, चाबी और नक्शे को देखा, तभी ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 7
द्वारा harshad solanki
  • 489

अचानक जगा की जोर जोर की कान फोड़ने वाली चीखें वातावरण में गूंज उठी. हम सब दहशत से थरथरा गए. क्या हो गया? सब के मन में एक ही ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग 19
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 381

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे-भाग-19  चलो जान छूटी    “तुम्हारी शादी हो गई उस मत्स्यकन्या या जलपरी से अथवा मरमेंड या जो भी तुम कहो, उससे?” उस नवागंतुक डाकू ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 6
द्वारा harshad solanki
  • 479

"अरे! ये तो मर गया! इसकी हत्या किसने की!?" हसमुख चीख पड़ा.तुरंत हम सब की नजर उस लाश पर पड़ी. "ओ...ह गोद...!" एक उद्गार के साथ सब की आंखें ...

महारानी लक्ष्मीबाई की अमर गाथा
द्वारा राज बोहरे
  • 356

ऐतिहासिक कहानी-                         महारानी लक्ष्मीबाई की अमर गाथा   “ तुम्हारे पति बिना संतान मरे हैं, इसलिये अब झाँसी पर हमारा कब्जा होगा ”   अंग्रेजों के सबसे बड़े ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग 18
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 321

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग-18  एक विद्रोह    अंधेरी रात। मशालों की लपलपाती रौशनी और भयानक बोझिल सा वातावरण। मेरे प्रेम ने मेरे साथ साथ मेरे मित्र… मेरे ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 5
द्वारा harshad solanki
  • 900

हम देर तक सोच विचार करते रहे. हमारे मन में बहुत से संदेह पैदा हो रहे थे. उस मनहूस आदमी और नानू की मिलीभगत पर भी हमने सोचा. पर ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 18
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 360

भाग-18  एक विद्रोह    अंधेरी रात। मशालों की लपलपाती रौशनी और भयानक बोझिल सा वातावरण। मेरे प्रेम ने मेरे साथ साथ मेरे मित्र… मेरे अभिन्न मित्र गेरिक के प्राण ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 4
द्वारा harshad solanki
  • 1.7k

जब हमारी वहां बातचीत चल रही थी, तभी कृष्णा को ऐसा लगा जैसे कोई उन्हें देख रहा हो. उसने मुड़कर एक नजर देखा; और तुरंत ही अपना चेहरा वापस ...

life is Mathematics
द्वारा Anant Dhish Aman
  • 2.3k

बचपन और गणित मुझे गणित विषय से शुरु से हीं खास रुचि नही रही जिसका सबसे बङा कारण अंको के साथ खेलना हीं नही आया ।। आठवां बोर्ड के इग्जाम में ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 17
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 2.1k

भाग-17  प्रेम का अनावरण    ऊपर आते ही इन लोगों ने मुझे घेरे में ले लिया। और उस गुप्तचर ने तो बढ़कर मुझे जकड़ लिया और एक खंजर मेरे ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 3
द्वारा harshad solanki
  • 926

लखन अंकल ने शराब का गिलास उठाते हुए घडी में देखा. रात्रि के बारह बजने को हुए थे. उसने शुरू किया.कहानी शुरू होती है हसमुख के दादा मेघ्नाथ्जी के ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 2
द्वारा harshad solanki
  • 938

"क्या बात है? तुम्हारी पापा के साथ बात हो रही थी तब मैं वहीँ बैठी हुई थी! तुम्हारी बात सुनकर पापा गभरा गए थे. ऐसी क्या बात हो गई?""ओह! ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 16
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 583

    अब तक आपने पढ़ा... सहसा प्रकाश की एक किरण नज़र आई। एक लपलपाती हुई अग्नि... फिर उसे धारण किये हुये एक हाथ। एक परछाई ऊपर छत की ...