ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 11 Harish Kumar Amit द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 11

Harish Kumar Amit मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी लघुकथा

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' हिसाब दफ़्तर में उसकी बगलवाली सीट पर बैठनेवाली सहकर्मी रोज़ाना के वक़्त से आधा घंटा देर से आई. उसने गौर से उसे देखा. सहकर्मी का चेहरा मुर्झाया हुआ था. आँखें तो ऐसी लग ...और पढ़े