तेरे शहर के मेरे लोग - 6 Prabodh Kumar Govil द्वारा जीवनी में हिंदी पीडीएफ

तेरे शहर के मेरे लोग - 6

Prabodh Kumar Govil द्वारा हिंदी जीवनी

( छह )मेरे जीवन में आने वाले इस परिवर्तन का असर मेरे मित्रों, परिजनों और शुभचिंतकों पर क्या पड़ने जा रहा था, ये देखना भी दिलचस्प था।मैं अपनी इक्कीस वर्ष की सरकारी नौकरी छोड़ करबैंक से एक शिक्षण संस्थान ...और पढ़े