अरुंधति Roopanjali singh parmar द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

अरुंधति

Roopanjali singh parmar मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ

विजय.. विजय.. दरवाजा खोलो.. विजय.. अरे अरु तुम.. इतनी रात को मेरे कमरे में आई हो सब ठीक है ना? (विजय ने दरवाजा खोलते ही पूछा) विजय मैं कैसी लग रही हूँ.. (अरुंधति ने पूछा) सच में अरु हद ...और पढ़े