दुःख या अवसाद Roopanjali singh parmar द्वारा मनोविज्ञान में हिंदी पीडीएफ

दुःख या अवसाद

Roopanjali singh parmar मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी मनोविज्ञान

कुछ लोग इतने दुःखी होते हैं, कि जरा सी बातें ही इनकी आंखों को भर देती हैं। दुःख इस हद तक इनमें शामिल होता है कि ये सुख और दुःख के भेद को समझना भूल चुके होते हैं। इन्हें ...और पढ़े